अगले 8 महीने में 5 राज्यों में चुनाव, इनकी 85 लोकसभा सीटों में से एनडीए ने 73 और यूपीए ने 10 जीतीं

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नई दिल्ली.अगले 8 महीनों में 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन राज्यों में 85 लोकसभा सीटें आती हैं। इनमें से इस बार एनडीए ने 73और यूपीए ने 10 सीटें जीतीं। पिछली बार इन सीटों में से एनडीए ने 70 और यूपीए ने 7 सीटें जीती थी। 2014 में लोकसभा चुनाव के बाद हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा को फायदा मिला था और इन 5 राज्यों में से चार में एनडीए ने सरकार बनाई थी। नई सरकार बनने के बाद राम मंदिर निर्माण, धारा 370 खत्म करनेऔर5 लाख तक की आय टैक्स फ्री होने की उम्मीद है।

तीन राज्यों में अभी एनडीए सत्ता में, यहां की 72 में से एनडीए ने 63 सीटें जीतीं

राज्य

2019 में नतीजे क्या रहे?

पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजे

एनडीए

यूपीए

एनडीए

यूपीए

महाराष्ट्र (48)

41 5

भाजपा : 122

शिवसेना : 63

कांग्रेस : 42

राकांपा : 41

हरियाणा (10)

10 0

भाजपा : 47

कांग्रेस : 15

झारखंड (14)

12 2

भाजपा : 37

आजसू : 5

कांग्रेस : 7

जम्मू-कश्मीर (6)

3 3

भाजपा : 25

पीडीपी : 28

कांग्रेस : 12

नेकां : 15

दिल्ली (7)

7 0

भाजपा : 3

कांग्रेस : 0

तीन राज्यों पर रहेगी नजर
1) महाराष्ट्र

2014 के लोकसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद भाजपा और शिवसेना में मतभेद बढ़ गए थे। इसके बाद भाजपा और शिवसेना ने विधानसभा चुनाव अलग-अलग लड़ा था। नतीजों में भाजपा को 122 और शिवसेना को 63 सीटें मिलीं। इसके बाद कुछ दिनों तक दोनों दलों के बीच अनिर्णय की स्थिति रही। आखिरकार शिवसेना और भाजपा ने दोबारा गठबंधन किया और सरकार बनाई।

2) दिल्ली
2013 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया था। 2013 में अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई। लेकिन दो महीने बाद ही फरवरी 2014 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 2015 में दोबारा वहां चुनाव हुए। इस चुनाव में केजरीवाल की लहर में भाजपा 70 में से सिर्फ 3 सीटें जीत पाई। आप को 67 सीटें मिलीं और कांग्रेस खाली हाथ रही।

3) जम्मू-कश्मीर
राज्य में 2014 में विधानसभा चुनाव हुए। इसमें किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला। मार्च 2015 में भाजपा ने पीडीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई और मुफ्ती मोहम्मद सईद मुख्यमंत्री बने। 2016 में उनके निधन के बाद 88 दिन मुख्यमंत्री पद खाली रहा। बाद में भाजपा ने महबूबा मुफ्ती को समर्थन दिया और वे मुख्यमंत्री बनीं। जून 2018 में भाजपा ने पीडीपी से समर्थन वापस ले लिया और मेहबूबा मुफ्ती को इस्तीफा देना पड़ा।

तीन प्रमुख मुद्दों परआगे क्या?

  1. राम मंदिर पर कोर्ट के फैसले का इंतजार फैसला हक में नहीं आया तो अध्यादेश संभव :सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित तीन सदस्यों की मध्यस्थता कमेटी अपनी रिपोर्ट अगस्त में सौंपने वाली है। इसके बाद कोर्ट का फैसला अगर मंदिर के निर्माण के खिलाफ आया तो सरकार अध्यादेश ला सकती है। चुनाव के दौरान भाजपा नेता ऐसा कहते आए हैं। अगर पक्ष में आया तो सरकार मंदिर निर्माण में तेजी दिखाने की बात कर चुकी है।
  2. धारा-370 खत्म करना बड़ी चुनौती बनी रहेगी; बेशक शाह इसका वादा कर चुके हैं :प्रचार के दौरान भाजपा अध्यक्ष अमित शाह घोषणा कर चुके हैं कि सरकार बनते ही कश्मीर से धारा-370 हटा दी जाएगी। इसके लिए शिवसेना भी लगातार दबाव बनाती आई है। इसी के साथ सरकार को कश्मीर में पाकिस्तानी नागरिकों को बसने का अधिकार देने वाली व्यवस्था के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार है।
  3. 5 लाख तक की आय टैक्स फ्री होने की उम्मीद, पहले ही बजट सत्र में मंजूरी संभव :पांच लाख तक की आय पर आयकर छूट का मसौदा संसद में आएगा। चुनाव से पहले अंतरिम बजट में सरकार ने घोषणा की थी कि यह छूट 1 अप्रैल से लागू होगी।

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