फिएट क्रिसलर ने रेनॉ में मर्जर का प्रस्ताव दिया, दुनिया की तीसरी बड़ी ऑटो कंपनी बनेगी

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मिलान (पेरिस). इटेलियन-अमेरिकन ऑटो कंपनी फिएट क्रिइसलर (एफसीए) ने सोमवार को फ्रांस की रेनॉ के साथ मर्जर का प्रस्ताव दिया। दोनों कंपनियां के एक होने से दुनिया की तीसरी बड़ी ऑटो कंपनी बनेगी जिसका वैल्यूएशन 35 अरब डॉलर (2.45 लाख करोड़ रुपए) और सालाना 87 लाख वाहन प्रोडक्शन की क्षमता होगी। जर्मनी की फॉक्सवैगन दुनिया की सबसे बड़ी और जापान टोयोटा दूसरी बड़ी कार निर्माता कंपनी है।

  1. दुनिया की 10 बड़ी ऑटो कंपनियां

    कंपनी 2018 में वाहन बिक्री (यूनिट)
    फॉक्सवैगन ग्रुप (जर्मनी) 1.09 करोड़
    टोयोटा (जापान) 1.06 करोड़
    जनरल मोटर्स (यूएस) 83.8 लाख
    फोर्ड (यूएस) 60 लाख
    निसान (जापान) 55.2 लाख
    होंडा (जापान) 53.2 लाख
    फिएट क्रिइसलर (इटली-अमेरिका) 48.4 लाख
    रेनॉ (फ्रांस) 38.8 लाख
    पीएसए (फ्रांस) 38.8 लाख
    सुजुकी (जापान) 33.3 लाख
  2. फिएट क्रिइसलर के रेनॉ में मर्जर के प्रस्ताव का निवेशकों ने भी स्वागत किया है। एफसीए के शेयर में सोमवार को 10% और रेनॉ के शेयर में 14% उछाल आया। रेनॉ का कहना है कि वह फिएट क्रिइसलर के प्रस्ताव की दिलचस्पी के साथ स्टडी कर रही है। बताया जा रहा है कि रेनॉ का बोर्ड अगले हफ्ते फैसला ले सकता है।

  3. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक मर्जर के बाद बनने वाली कंपनी के चेयरमैन एजनेली फैमिली के सियोन जॉन एल्कन होंगे। रेनो के चेयरमैन जेन-डॉमिनिक नई कंपनी के सीईओ हो सकते हैं। एजनेली फैमिली के पास एफसीए के 29% शेयर हैं।

  4. एफसीए का कहना है कि मर्जर के बाद रिसर्च, खरीद लागत और अन्य गतिविधियों में शेयरिंग से दोनों कंपनियों की सालाना 5.6 अरब डॉलर की बचत होगी। एफसीए का कहना है कि वह कोई प्लांट बंद नहीं करेगी लेकिन नौकरियों में कमी के मुद्दे का समाधान नहीं कर सकती। एफसीए की अमेरिका और एसयूवी मार्केट में अच्छी पकड़ है। रेनॉ यूरोप में मजबूत है और इलेक्ट्रिक व्हीकल डेवलपमेंट में आगे है।

  5. फ्रांस की सरकार ने एफसीए के प्रस्ताव का समर्थन किया है लेकिन वह शर्तों को ध्यान से अध्ययन करना चाहती है। रेनॉ कंपनी में फ्रांस सरकार की 15% हिस्सेदारी है।

  6. एफसीए और रेनॉ का मर्जर रेनॉ की 20 साल पुरानी सहयोगी निसान के लिए बड़ा झटका हो सकता है। पूर्व चेयरमैन कार्लोस घोन की गिरफ्तारी और उन्हें बोर्ड से बर्खास्त करने जैसे मामलों की वजह से निसान पहले ही परेशानियों में है।

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