मानवाधिकार संरक्षण संशोधन विधेयक पास

0
9



नई दिल्लीसंसद ने सोमवार को को मंजूरी दे दी। सरकार ने भरोसा जताया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राज्य मानवाधिकार आयोगों को और अधिक सक्षम बनाने में विधेयक के प्रावधानों से मदद मिलेगी। राज्यसभा ने विधेयक को चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है।

इस विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए ने विपक्ष के कुछ सदस्यों की इन आपत्तियों को निराधार बताया कि पुनर्नियुक्ति के प्रावधान के कारण यह ‘सरकार का आयोग’ बन जाएगा। शाह ने कहा कि आयोग के सदस्य की नियुक्ति एक समिति करती है, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा के अध्यक्ष, राज्यसभा के उपसभापति तथा संसद के दोनों सदनों के नेता प्रतिपक्ष या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता होते हैं।

शाह ने कहा कि समिति द्वारा नियुक्ति के बारे में यदि इस तरह के संदेह किया जाएगा तो ‘कोई भी लोकतांत्रिक संस्था काम नहीं कर पाएगी।’ उन्होंने कहा कि आयोग के सदस्यों के कार्यकाल को 5 साल से घटाकर 3 साल करने का उद्देश्य है कि खाली पदों को भरा जा सकेगा। उन्होंने पुनर्नियुक्ति के प्रावधानों को लेकर विपक्ष के सदस्यों के संदेहों पर कहा कि इनकी पुनर्नियुक्ति सरकार नहीं नियुक्ति समिति करेगी।

साथ ही आयोग के नियम के तहत इसका कोई सदस्य या अध्यक्ष सरकार के किसी अन्य पद पर नियुक्त नहीं हो सकता है। विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार की नीति है कि ‘न किसी पर अत्याचार हो, न किसी अत्याचारी को बख्शा जाए।’

विधेयक के प्रावधान के अनुसार राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष के रूप में ऐसा व्यक्ति होगा, जो सुप्रीम कोर्ट का चीफ जस्टिस रहा हो। उसके अतिरिक्त किसी ऐसे व्यक्ति को भी नियुक्त किया जा सके जो सुप्रीम कोर्ट का जज रहा हो। इसमें आयोग के सदस्यों की संख्या दो से बढ़ाकर तीन करने का प्रावधान है, जिसमें एक महिला हो।

इसमें प्रस्ताव किया गया है कि आयोग और राज्य आयोगों के अध्यक्षों और सदस्यों की पदावधि को पांच वर्ष से कम करके तीन वर्ष किया जाए और वे पुनर्नियुक्ति के पात्र होंगे। इस संशोधन विधेयक के माध्यम से आयोग के अध्यक्ष के रूप में ऐसे व्यक्ति को भी नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है, जो सुप्रीम कोर्ट का जज रहा है। गृह राज्य मंत्री राय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नीत सरकार की नीतियों के केंद्र में ‘मानव और मानवता का संरक्षण’ है।



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here