'गैर-राजनीतिक केस में ही CBI का काम अच्छा क्यों?'

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नई दिल्ली
भारत के ने मंगलवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) पर तंज कसा है। गोगोई ने सवाल किया कि ऐसा क्यों होता है कि जब किसी मामले का कोई राजनीतिक रंग नहीं होता, तब सीबीआई अच्छा काम करती है। एक कार्यक्रम में बोलते हुए जस्टिस गोगोई ने यह सलाह भी दी कि सीबीआई को कंट्रोलर ऐंड ऑडिटर जनरल (सीएजी) के समान वैधानिक दर्जा दिया जाना चाहिए ताकि एजेंसी को सरकार के ‘प्रशासनिक नियंत्रण’ से पूरी तरह ‘अलग’ किया जा सके।

जस्टिस गोगोई दो साल के बाद आयोजित किए गए डी पी कोहली मेमोरियल लेक्चर के 18वें संस्करण में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने सीबीआई की कमियों और ताकतों के बारे में साफ बात की और उसे आगे बढ़ने के बारे में सलाह भी दी। उन्होंने कहा, ‘यह सच है कि कई हाई प्रोफाइल और संवेदनशील मामलों में एजेंसी न्यायिक जांच के मानकों को पूरा नहीं कर पाई है। यह बात भी उतनी ही सच है कि इस प्रकार की खामियां शायद कभी-कभार नहीं होती।’

‘नहीं होता राजनीतिक रंग तो सीबीआई का काम बेहतर’
जस्टिस गोगोई ने आगे कहा कि इस प्रकार के मामले प्रणालीगत समस्याओं को उजागर करते हैं और संस्थागत आकांक्षाओं, संगठन की संरचना, कामकाज की संस्कृति और शासन करने वाली राजनीति के बीच तालमेल की गहरी कमी की ओर संकेत करते हैं। उन्होंने कहा, ‘ऐसा क्यों है कि जब किसी मामले का कोई राजनीतिक रंग नहीं होता, तब सीबीआई अच्छा काम करती है। इसके उलट स्थिति के कारण विनीत नारायण बनाम भारत संघ मामला सामने आया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने एजेंसी की सत्यनिष्ठा की रक्षा करने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश तय किए।’

सीबीआई को मिले सीएजी के समान दर्जा
गोगोई ने यह सलाह भी दी कि सीबीआई की जांच प्रक्रिया को किसी राजनीतिक दबाव से दूर रखने के लिए इसको कंट्रोलर ऐंड ऑडिटर जनरल (सीएजी) के समान वैधानिक दर्जा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे सीबीआई सरकार के ‘प्रशासनिक नियंत्रण’ से पूरी तरह ‘अलग’ हो सकेगी। उनका कहना था कि हाल ही में लोकपाल का लागू होना एक अच्छी प्रगति है, लेकिन मौजूदा चुनौती यह तय करने की है कि सीबीआई को कैसे एक सक्षम और निष्पक्ष जांच एजेंसी बनाया जाए जो जनता की सेवा करने के उद्देश्यों से पूरी तरह प्रेरित हो, संवैधानिक अधिकारों और लोगों की स्वतंत्रता को बरकरार रखे और जटिल समय में अच्छा प्रदर्शन करने में सक्षम हो।

जस्टिस गोगोई ने सीबीआई में स्टाफ की कमी को भी एक प्रमुख चिंता बताया। उन्होंने कहा कि एग्जिक्युटिव रैंक में 15 पर्सेंट, लॉ ऑफिसर्स के 28.37 पर्सेंट और टेक्निकल ऑफिसर्स के 56.17 पर्सेंट पद खाली हैं।



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